यौन अपराधों की रिपोर्टिंग पर कानूनी प्रावधान
अंतिम अपडेट: 24 अक्टूबर 2026
यौन अपराधों और बच्चों से जुड़ी खबरों में पहचान उजागर करना कानूनन अपराध हो सकता है और पीड़ित को गहरा नुकसान पहुँचा सकता है। इसलिए Lncinema ऐसी खबरों में इस पेज पर बताए सिद्धांतों का पालन करता है। यह पेज हमारी नीति का सामान्य सार है और कानूनी सलाह नहीं है।
मुख्य कानूनी प्रावधान (संक्षेप में)
- भारतीय न्याय संहिता में यौन अपराधों के पीड़ित की पहचान छापने या प्रकाशित करने पर रोक का प्रावधान है (पहले यह भारतीय दंड संहिता की धारा 228A में था)।
- यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO) में मीडिया रिपोर्टिंग में बच्चे की पहचान उजागर करने पर रोक के प्रावधान हैं।
- किशोर न्याय अधिनियम में विधि-विरुद्ध कार्य में शामिल या देखरेख की ज़रूरत वाले बच्चे की पहचान छापने पर रोक है।
- अदालत के विशेष आदेश या गोपनीयता निर्देश भी रिपोर्टिंग पर लागू होते हैं।
कानून में संशोधन होते रहते हैं, इसलिए संबंधित धाराओं और ताज़ा स्थिति के लिए आधिकारिक स्रोत या वकील से सलाह लें।
हम क्या नहीं छापते
- पीड़ित का नाम, पता, स्कूल या दफ़्तर, परिवार के सदस्यों के नाम और ऐसी जानकारी जिससे पहचान संभव हो।
- पीड़ित की तस्वीर, वीडियो, आवाज़ या ऐसा चित्र जिससे चेहरा पहचाना जा सके।
- अदालत की कार्यवाही का वह हिस्सा जिस पर रोक है।
- पीड़ित या उसके परिवार से जुड़े अपुष्ट और अपमानजनक अनुमान।
हम क्या करते हैं
- खबर में तथ्य, कार्रवाई और संस्थागत जवाबदेही पर ध्यान देते हैं।
- पीड़ित के लिए सम्मानजनक भाषा का उपयोग करते हैं, सनसनीखेज या यौन ब्योरे नहीं देते।
- जब संभव हो, मदद और शिकायत के आधिकारिक माध्यम बताते हैं।
- संदेह होने पर प्रकाशन से पहले संपादक और ज़रूरत हो तो कानूनी सलाह लेते हैं।
मनोरंजन खबरों में इसका मतलब
कभी-कभी कलाकारों या इंडस्ट्री से जुड़े ऐसे आरोप सामने आते हैं। हम आरोप और साबित तथ्य में साफ़ फ़र्क रखते हैं, दोनों पक्षों का बयान लेने की कोशिश करते हैं और अपुष्ट सूचना को फैलाने से बचते हैं।
गलती से पहचान उजागर होने पर
अगर हमारी किसी सामग्री में ऐसी जानकारी रह गई हो, तो तुरंत Lncinema078@gmail.com पर बताएँ। हम उसे प्राथमिकता से हटाएँगे या बदलेंगे और संबंधित सोशल पोस्ट भी हटाएँगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या पीड़ित की सहमति हो तो नाम छाप सकते हैं? कानून में कुछ सीमित अपवाद हैं, पर हम सामान्यतः पहचान उजागर नहीं करते और अपवाद पर कानूनी सलाह के बाद ही विचार करते हैं।
क्या आरोपी का नाम छाप सकते हैं? जहाँ कानूनी रूप से अनुमत और जनहित में हो, पर इससे पीड़ित की पहचान उजागर नहीं होनी चाहिए।
