Asian games 2023: पैर से खून बहता रहा, मगर देश के लिए गुलवीर सिंह दौड़ते रहे, चोट पहुंचाने वाले रनर को मेडल से ‘जवाब

Google News Logo Follow Google News Follow Now
Join WhatsApp group Join Now
Join Telegram group Join Now

हिन्दी खबरों की तरह, हम आपको गुलवीर सिंह की अत्यधिक प्रोत्साहक और अद्भुत कहानी से परिचित करवाते हैं – एक योद्धा की कहानी, जिन्होंने आसमान को छूने का सपना देखा और उसे पूरा किया।

भारतीय एशियन गेम्स में हुई 10 हजार मीटर रेस में गुलवीर सिंह ने दिखाया कि संघर्ष और समर्पण की भावना कुछ भी संभव बना सकती है। चोट के बावजूद, उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का मान बढ़ा दिया।

हिन्दी खबर: गुलवीर सिंह की कहानी

गुलवीर सिंह ने 10 हजार मीटर रेस में भारत को गर्वित किया। उन्होंने दौड़ते समय अपने पैरों को चोट लग गई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

मेडल की बारीकी

भारत ने इस रेस में 2 मेडल जीते – सिल्वर और ब्रॉन्ज। कार्तिक कुमार ने सिल्वर मेडल जीता, जबकि गुलवीर सिंह ने ब्रॉन्ज जीतकर दिलों को छू लिया। इससे पहले, 1998 एशियाड के बाद, भारत ने पहली बार इस इवेंट में मेडल जीता।

दुर्दशा का सामना

गुलवीर के पैरों से खून बह रहा था, लेकिन उन्होंने देश के लिए दौड़ते रहे। चोट के बावजूद, उन्होंने मेडल जीतकर अपने जज्बे की मिसाल पेश की।

योद्धा की जज्बे में दम

गुलवीर सिंह ने दिखाया कि उनकी जज्बे में दरअसल दर्द कुछ नहीं। चोट के बावजूद, वे रुके नहीं और मेडल जीतकर आपको यह सिखाते हैं कि कुछ भी संभव है जब आपके पास अदम्य संकल्प हो।

अफसोस का संकेत

चोट के बावजूद, वो देश के लिए दौड़ते रहे, और उनके पैरों की चोट ने उनकी उड़ान को रोका नहीं। इस जीत के पीछे उनका अद्वितीय समर्पण और योद्धा भावना छुपी है, जिसके बदले में वे ब्रॉन्ज मेडल से नवाज उठे।

Google News Logo Follow Google News Follow Now
Join WhatsApp group Join Now
Join Telegram group Join Now

Leave a Comment


Google News Logo Follow Google News Follow Now
Join WhatsApp group Join Now
Join Telegram group Join Now